गिग वर्कर की हड़ताल के बीच फ़ूड डिलीवरी कंपनियों ने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की घोषणा की

 दस मिनट में डिलीवरी के असुरक्षित मॉडल को समाप्त करने समेत मांगों को लेकर गिग वर्करों की नव वर्ष की पूर्व संध्या पर देशव्यापी हड़ताल के बीच ज़ोमैटो और स्विगी जैसी फ़ूड डिलीवरी ऐप आधारित कंपनियों ने प्रोत्साहन राशि बढ़ाने की घोषणा की। 

गिग वर्करों की अन्य मांगों में प्लेटफार्म कंपनियों का श्रम क़ानूनों के तहत पंजीकरण करने, मनमाने तरीके से आईडी ब्लॉक करने और पेनल्टी लगाने पर प्रतिबंध लगाने, समुचित पारिश्रमिक, स्वास्थ्य-दुर्घटना बीमा और पेंशन की सामाजिक सुरक्षा देने और संगठित होकर सामूहिक रूप से अपनी मांगों पर बात करने के अधिकार की माँग शामिल थीं।

हड़ताल का आह्वान तेलंगाना गिग एंड प्लेटफार्म वर्कर्स यूनियन और इंडियन फेडरेशन ऑफ़ ऐप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स  ने दिया था। इसमें फ़ूड डिलीवरी ऐप ज़ोमैटो, स्विगी के अलावा क्विक कॉमर्स कंपनियों जैसे ब्लिंकिट, इंस्टामार्ट और ज़ेप्टो के वर्कर शामिल हुए।

हड़ताल के बीच ज़ोमैटो ने नव वर्ष की पूर्व संध्या पर पीक समय (शाम छह बजे से रात 12 बजे तक) 120 से 150 रुपये प्रति ऑर्डर देने की घोषणा की। प्लेटफार्म ने कहा कि आज के एक दिन में कमाई 3000 रुपए तक जा सकती है। इसीके साथ ज़ोमैटो ने ऑर्डर के मना करने और रद्द होने पर पेनल्टी भी अस्थायी तौर पर समाप्त करने की घोषणा की।

उधर स्विगी ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स को 31 दिसंबर और एक जनवरी के दो दिनों में 10,000 रुपए तक की कमाई का आश्वासन दिया। 

इन कंपनियों ने जहाँ दावा किया कि हड़ताल का कोई असर नहीं हुआ, टीजीपीडब्ल्यूयू और आईइफ़एटी ने रात को जारी एक संयुक्त बयान में कहा था कि देश भर से 1.70 लाख गिग वर्करों ने हड़ताल में शामिल होने की पुष्टि की है। 

दरअसल, असुरक्षित डिलीवरी (दस मिनट में डिलीवर करने के दबाव के कारण), हाल में पारिश्रमिक घटाने से घंटों काम करने के बावजूद कमाई कम हो जाने और गरिमाहीन कार्य स्थितियों के ख़िलाफ़ 25 दिसंबर को भी गिग वर्करों ने हड़ताल की थी। इस बीच, कंपनियों की तरफ़ से कोई प्रतिसाद न मिलने पर 31 दिसंबर की हड़ताल की घोषणा की गई। 

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